सामाजिक कार्यक्रम · Tehrvi
तेरहवीं, शोक बैठक और पगड़ी रस्म का इंतज़ाम: कई दिन का शामियाना, श्रद्धांजलि सभा और सादा भोज (Tehrvi Ka Intezaam)

घर में किसी के जाने के बाद के तेरह दिन परिवार के लिए सबसे कठिन होते हैं। इन दिनों में रिश्तेदार और गांव वाले रोज़ घर आकर परिवार के पास बैठते हैं, और तेरहवें दिन तेरहवीं, श्रद्धांजलि सभा और पगड़ी रस्म होती है। ऐसे समय में परिवार को सामान की चिंता न करनी पड़े, यही इस इंतज़ाम का मकसद है। भारत टेंट एंड लाइट हाउस, खोरडा शोक की बैठक से तेरहवीं तक सादा और सम्मानजनक इंतज़ाम करता है; बस एक फ़ोन कर दें।
1. शोक के दिनों की बैठक: कई दिन टिकने वाला शामियाना
जाने के अगले दिन से ही लोग परिवार के पास बैठने आने लगते हैं। इसके लिए:
- घर के बाहर शामियाना, जो तेरहवीं तक वहीं लगा रहे
- नीचे दरी, और बुज़ुर्गों के लिए कुछ कुर्सियां
- पीने के पानी का इंतज़ाम, ताकि दूर से आए लोगों को परेशानी न हो
- शाम को बैठक देर तक चले तो शामियाने में सादी सफ़ेद रोशनी
यह बैठक बिना किसी तैयारी के, तुरंत चाहिए होती है। हमारा फ़ोन 24 घंटे चालू है: 99918 64283।
2. औरतों की अलग जगह
ज़्यादातर गांवों में औरतें घर के अंदर या आंगन में अलग बैठती हैं। आंगन में जगह कम हो तो:
- आंगन में या घर के पास कनात से घिरा अलग हिस्सा
- वहां दरी और गद्दे, क्योंकि औरतें अक्सर कई घंटे ज़मीन पर बैठती हैं
3. श्रद्धांजलि सभा: बोलने वालों के लिए माइक
तेरहवीं वाले दिन होने वाली शोक सभा या श्रद्धांजलि सभा में गांव के बड़े, रिश्तेदार और जान-पहचान वाले दो शब्द बोलते हैं। इसके लिए:
- सामने एक छोटी टेबल, जिस पर माइक और जाने वाले की तस्वीर, माला के साथ
- माइक और स्पीकर, ताकि भीड़ में पीछे बैठे लोग भी हर बात सुन सकें; आवाज़ धीमी और साफ़, बिना किसी गाने के
- सभा के लिए कुर्सियों की कतारें, बीच में आने-जाने का रास्ता
बोलने वालों के नाम पुकारने के लिए परिवार किसी एक व्यक्ति को माइक की ज़िम्मेदारी सौंप दे।
4. पगड़ी रस्म की जगह
पगड़ी रस्म में परिवार के बड़े, घर की ज़िम्मेदारी संभालने वाले को पगड़ी बांधते हैं। यह रस्म सबके सामने होती है, इसलिए:
- सभा के सामने बीच में खुली जगह, जहां वह बैठ सके और बड़े चारों तरफ़ खड़े हो सकें
- वहां बैठने के लिए सादा आसन या कुर्सी
- रस्म के बाद लोगों से मिलने के लिए पास में कुछ कुर्सियां
5. हवन या पाठ
कई परिवार तेरहवीं पर हवन या पाठ करवाते हैं। हवन खुले शामियाने के नीचे रखें, बैठक वाली जगह से थोड़ा हटकर; पंडित जी और परिवार के लिए दरी और आसन हम लगा देते हैं।
6. तेरहवीं का भोज
सभा के बाद रिश्तेदारों और गांव के लिए भोज होता है। हमारा हलवाई घर पर ही सादा भोजन बनाता है, और बड़े बर्तन, क्रॉकरी और परोसने का सामान हम लाते हैं। भोज बड़ा हो, पूरे कुनबे या गांव का, तो बारी-बारी पंगत का तरीका हमारी काज गाइड में बताया है।
शोक के इन दिनों में सामान लाना, लगाना और तेरहवीं के बाद ले जाना, सब हमारी ज़िम्मेदारी है; 25 किमी तक इसका कोई अलग पैसा नहीं। परिवार जो बजट बताए, उसमें बैठक, सभा और भोज का इंतज़ाम एक ही बार में तय कर देते हैं, ताकि बार-बार हिसाब की बात न करनी पड़े।
सवाल-जवाब
शोक के दिनों में बैठक के लिए शामियाना कितने दिन लगा रहेगा?Shok ke dino me baithak ke liye shamiyana kitne din laga rahega?
जितने दिन परिवार चाहे, आम तौर पर तेरहवीं तक। शामियाना, दरी और कुछ कुर्सियां एक बार लगाकर वहीं छोड़ देते हैं, और तेरहवीं की सभा के लिए उसी जगह को बढ़ा देते हैं। सब काम पूरा होने के बाद ही समेटते हैं।
तेरहवीं की श्रद्धांजलि सभा में क्या-क्या चाहिए?Tehrvi ki shraddhanjali sabha me kya kya chahiye?
सामने एक छोटी टेबल पर तस्वीर, माला और माइक, पीछे तक आवाज़ पहुंचाने वाले स्पीकर, लोगों के लिए कुर्सियों की कतारें और बीच में रास्ता। भारत टेंट एंड लाइट हाउस, खोरडा यह सब सभा से पहले लगा देता है।
पगड़ी रस्म के लिए क्या इंतज़ाम करें?Pagdi rasam ke liye kya intezaam kare?
रस्म अक्सर श्रद्धांजलि सभा के आख़िर में होती है, और कई परिवारों में रिश्तेदार बारी-बारी आकर पगड़ी या शगुन देते हैं। इसलिए उस जगह के सामने इतनी खुली जगह रखें कि लोग कतार में आ सकें, और माइक पर रिश्तेदारों के नाम पुकारने वाला एक व्यक्ति तय कर दें।
शोक में औरतों के बैठने की अलग जगह कैसे बनेगी?Shok me auraton ke baithne ki alag jagah kaise banegi?
घर के आंगन में, और जगह कम हो तो घर के पास कनात से घेरकर अलग हिस्सा बना देते हैं, जिसमें दरी और गद्दे बिछे हों, क्योंकि औरतें अक्सर कई घंटे ज़मीन पर बैठती हैं।
अचानक ज़रूरत पड़े तो कितनी जल्दी इंतज़ाम हो जाता है?Achanak zarurat pade to kitni jaldi intezaam ho jata hai?
ऐसे समय में ज़रूरत अचानक ही पड़ती है, इसलिए हमारा फ़ोन 24 घंटे चालू रहता है: 99918 64283। कॉल करते ही बता देते हैं कि शामियाना और दरी कितनी देर में पहुंच जाएगी।