शादी के फंक्शन · Bahu Bhoj
बहू-भोज और रिसेप्शन घर पर: नई जोड़ी का स्टेज, शगुन की टेबल, बहू के आराम की जगह और पूरे गांव का खाना (Bahu Bhoj Ka Intezaam)

लड़के की शादी में फेरों के बाद जब बहू पहली बार घर आती है, तो उसके स्वागत में बहू-भोज होता है। शहरों में इसे रिसेप्शन कहते हैं। यह वह दिन है जब पूरा गांव, कुनबा और रिश्तेदार नई बहू से मिलते हैं, जोड़ी को आशीर्वाद और शगुन देते हैं, और साथ बैठकर खाना खाते हैं। लड़के वालों के लिए यह अक्सर पूरी शादी का सबसे बड़ा खाना होता है। Bahu bhoj ka intezaam तीन चीज़ों पर टिका है: जोड़ी का स्टेज, बहू का आराम, और खाने की ठीक व्यवस्था। भारत टेंट एंड लाइट हाउस, खोरडा घर के आंगन, गली या खेत में बहू-भोज का पूरा पंडाल लगाता है।
1. शादी से ठीक बाद का समय
बहू-भोज अक्सर शादी के अगले दिन या दो-चार दिन बाद होता है, यानी घुड़चढ़ी, निकासी और बारात के ठीक बाद। घर वाले थके होते हैं और समय कम होता है। इसलिए:
- बहू-भोज की तारीख शादी की बुकिंग के समय ही बता दें, ताकि दोनों फंक्शन का सामान एक साथ तय हो जाए
- तारीखें पास हों तो पहले से तय कर लें कि कौन सा सामान बीच में रुकेगा और कौन सा बदलेगा, ताकि बीच वाले दिन घर पर भाग-दौड़ न हो
- खाने वालों की गिनती बारात से अलग होती है: इसमें गांव और कुनबा भी आता है, इसलिए गिनती दोबारा लगाएं
2. नई जोड़ी का स्टेज
बहू-भोज का केंद्र जोड़ी का स्टेज है, जहां दूल्हा-दुल्हन घंटों बैठते हैं और हर मेहमान उनके पास आकर मिलता है:
- दो लोगों के बैठने का आरामदायक सोफ़ा, पीछे फूलों या पर्दों का बैकड्रॉप
- स्टेज इतना चौड़ा कि आशीर्वाद देने वाले परिवार जोड़ी के साथ खड़े होकर फोटो खिंचवा सकें
- चढ़ने के लिए चौड़ी सीढ़ियां, ताकि बुज़ुर्ग आराम से ऊपर आ सकें
- फोकस लाइट जोड़ी के चेहरे पर, ताकि रात में भी फोटो और वीडियो साफ़ आएं
3. शगुन और उपहार की टेबल
बहू-भोज में मेहमान शगुन, लिफ़ाफ़े और उपहार देते हैं। स्टेज के पास एक तरफ़:
- ढकी हुई टेबल और दो कुर्सियां, जहां घर का कोई भरोसेमंद व्यक्ति बैठकर शगुन लिखे
- उपहार रखने की अलग जगह, ताकि स्टेज पर सामान का ढेर न लगे
- इस टेबल पर अलग लाइट, ताकि नाम लिखने में दिक्कत न हो
4. बहू के आराम की जगह
नई बहू घंटों स्टेज पर बैठती है, और कई परिवारों में मुंह-दिखाई की रस्म भी होती है। उसके लिए:
- स्टेज के पीछे कनात से घिरा छोटा कमरा, जहां वह बीच में आराम कर सके, पानी पी सके और कपड़े ठीक कर सके
- गर्मी हो तो स्टेज के पास कूलर या पंखा
- मुंह-दिखाई के लिए औरतों का अलग बैठने का हिस्सा, अगर आपके परिवार का ऐसा रिवाज़ हो
5. पूरे गांव का खाना
बहू-भोज में आने वालों की गिनती बड़ी होती है, और हर उम्र के लोग आते हैं:
- बड़े पंडाल या जर्मन हैंगर में खाने की जगह, स्टेज से थोड़ा हटकर, ताकि खाने की भीड़ स्टेज के सामने न लगे
- बुज़ुर्गों और गांव वालों के लिए दरी पर पंगत, और रिश्तेदारों व नौजवानों के लिए बुफे, दोनों एक साथ चल सकते हैं
- हलवाई का सामान शादी से पहले ही आ चुका होता है; बहू-भोज के मेन्यू के हिसाब से हलवाई को पहले बता दें
- पानी का अलग काउंटर और हाथ धोने की जगह
6. शाम की रोशनी और DJ
बहू-भोज अगर शाम को है, तो:
- पूरे पंडाल में झालर और फ्लडलाइट, और प्रवेश पर रोशनी वाला गेट
- नौजवानों के लिए DJ (मांग पर), पर इतनी आवाज़ में कि स्टेज पर बड़े-बुज़ुर्ग आराम से बात कर सकें
- बिजली जाने पर जनरेटर, ताकि स्टेज और खाने की रोशनी न जाए
नई बहू का पहला दिन घर और गांव में उसकी पहली याद बनता है। बहू-भोज का पूरा हिसाब शादी के साथ ही कर लीजिए: स्टेज, पंडाल, लाइट और खाने का जितना बजट आप रखें, हम उसी में सबसे अच्छा इंतज़ाम सुझा देते हैं, और खोरडा से 25 किमी तक सामान पहुंचाने का कोई अलग पैसा नहीं। 99918 64283।
सवाल-जवाब
बहू-भोज के लिए क्या-क्या चाहिए?Bahu bhoj ke liye kya kya chahiye?
जोड़ी के लिए सोफ़े वाला सजा स्टेज, शगुन की टेबल, बहू के आराम के लिए कनात से घिरी जगह, मेहमानों के लिए पंडाल, पंगत या बुफे, हलवाई, और शाम हो तो रोशनी, DJ और जनरेटर।
बहू-भोज और रिसेप्शन में क्या फ़र्क है?Bahu bhoj aur reception me kya fark hai?
दोनों एक ही फंक्शन हैं: बहू के घर आने के बाद लड़के वालों की तरफ़ से दिया जाने वाला भोज। गांव में इसे बहू-भोज कहते हैं, शहरों में रिसेप्शन। गांव में अक्सर पंगत भी होती है, शहर में ज़्यादातर बुफे।
शादी और बहू-भोज का सामान एक साथ बुक कर सकते हैं?Shadi aur bahu bhoj ka saman ek saath book kar sakte hain?
हां, और यही बेहतर है। शादी की बुकिंग के समय ही बहू-भोज की तारीख बता दें, ताकि दोनों फंक्शन का सामान, स्टेज और पंडाल एक साथ तय हो जाए और बीच वाले दिन घर पर भाग-दौड़ न हो।
बहू-भोज का स्टेज कैसा सजाएं?Bahu bhoj ka stage kaisa sajaye?
दो लोगों का आरामदायक सोफ़ा, पीछे फूलों या पर्दों का बैकड्रॉप, चौड़ी सीढ़ियां और जोड़ी पर फोकस लाइट। स्टेज इतना चौड़ा रखें कि आशीर्वाद देने आया पूरा परिवार जोड़ी के साथ फोटो में आ जाए।
बहू-भोज में पंगत रखें या बुफे?Bahu bhoj me pangat rakhe ya buffet?
दोनों साथ चल सकते हैं: बुज़ुर्गों और गांव वालों के लिए दरी पर पंगत, और रिश्तेदारों व नौजवानों के लिए बुफे। भारत टेंट एंड लाइट हाउस, खोरडा दरी-पंगत और बुफे काउंटर, दोनों का सामान लाता है।