गांव के कार्यक्रम · Ragni Dangal Mela
रागनी प्रोग्राम, दंगल और मेले का इंतज़ाम: खुले मैदान का मंच, दूर तक आवाज़, कलाकारों का कमरा, अखाड़े के चारों तरफ़ छांव और स्टॉल (Ragni Program Ka Intezaam)

रागनी प्रोग्राम, दंगल, कबड्डी टूर्नामेंट और मेला हरियाणा के गांवों की रौनक हैं। इनमें घर के कार्यक्रमों से सबसे बड़ा फ़र्क है: हज़ारों लोग, खुला मैदान, और आयोजन एक कमेटी या पंचायत के हाथ में। यहां टेंट से ज़्यादा ज़रूरी है सबको मंच दिखना, सबको आवाज़ पहुंचना, और रात हो तो पूरे मैदान में रोशनी। भारत टेंट एंड लाइट हाउस, खोरडा खोरडा से 25 किमी तक के गांवों में ऐसे बड़े कार्यक्रमों के लिए मंच, साउंड, रोशनी, जनरेटर और बैठक लगाता है।
रागनी प्रोग्राम
1. ऊंचा और मज़बूत मंच
रागनी में कलाकार गाते भी हैं और अभिनय भी करते हैं, और भीड़ अक्सर ज़मीन पर दूर तक बैठती है:
- इतना ऊंचा मंच कि आख़िरी कतार तक कलाकार दिखें; मंच की चौड़ाई इतनी कि गायक, साज़ वाले और जोड़ी साथ खड़े हो सकें
- मंच पर ऊपर छत (शामियाना), ताकि ओस या हल्की बूंदाबांदी में साज़ भीगें नहीं
- मंच के पीछे बैकड्रॉप पर कमेटी या प्रोग्राम का नाम
2. कलाकारों का कमरा
कलाकार प्रोग्राम के बीच कपड़े बदलते और आराम करते हैं, इसलिए मंच के ठीक पीछे कनात से घिरा एक कमरा, जिसमें दरी, कुछ कुर्सियां, पानी और रोशनी हो। इससे कलाकारों को भीड़ से गुज़रकर नहीं जाना पड़ता।
3. दूर तक साफ़ आवाज़
खुले मैदान में आवाज़ फैल जाती है, इसलिए:
- मंच के दोनों तरफ़ ऊंचाई पर स्पीकर, और भीड़ बहुत दूर तक हो तो बीच में भी
- गायकों और साज़ों के लिए कई माइक और उन्हें संभालने के लिए मिक्सर
- इनाम और चंदे की घोषणा के लिए मंच पर अलग माइक, जो एंकर के पास रहे
4. पूरी रात की रोशनी
रागनी अक्सर रात भर चलती है। मंच पर रंगीन और फोकस लाइट, और भीड़ वाले पूरे मैदान में फ्लडलाइट, ताकि अंधेरे में धक्का-मुक्की न हो। यह सब रात भर चलने वाले जनरेटर के साथ।
दंगल और कबड्डी
5. अखाड़े के चारों तरफ़
अखाड़ा (कुश्ती की मिट्टी) और कबड्डी का मैदान कमेटी तैयार करती है; उसके चारों तरफ़ का इंतज़ाम हम करते हैं:
- दर्शकों के लिए चारों तरफ़ दरी, और पीछे की तरफ़ कुर्सियां, ताकि आगे बैठे और पीछे बैठे, दोनों देख सकें
- धूप में शामियाने, अखाड़े के चारों तरफ़ किनारों पर; अखाड़ा खुला रहता है
- पहलवानों और खिलाड़ियों के लिए अलग छायादार जगह और पानी
6. मेहमानों का मंच और इनाम वितरण
- एक तरफ़ मंच, जिस पर मुख्य मेहमान, कमेटी और जज बैठें, कुर्सियों और टेबल के साथ
- एंकर का माइक, जिससे हर कुश्ती और हर इनाम की घोषणा हो
- आख़िर में इनाम वितरण उसी मंच पर, पीछे बैकड्रॉप और फोटो के लिए रोशनी
मेला
7. स्टॉल और रास्ते
- दुकानों और स्टॉल के लिए कैनोपी, एक कतार में
- स्टॉल की कतारों के बीच के रास्ते पर झालर और लाइट, शाम के मेले के लिए
- जगह-जगह स्पीकर, खोया-पाया और घोषणाओं के लिए
- सांस्कृतिक कार्यक्रम हो तो एक तरफ़ छोटा मंच
कमेटी के साथ तालमेल
बड़े कार्यक्रम में बुकिंग से पहले कमेटी से एक व्यक्ति तय कर लें, जो जगह, समय और ज़रूरत की बात करे। मैदान का नक्शा या फोटो, अनुमानित भीड़, कार्यक्रम कितने घंटे या कितने दिन, और बिजली है या नहीं, ये चार बातें मिल जाएं तो पूरा प्लान बन जाता है। पुलिस या प्रशासन की अनुमति कमेटी अपनी तरफ़ से ले ले।
चंदे से चलने वाले कार्यक्रम में हर रुपये का हिसाब मायने रखता है; कमेटी जो बजट तय करे, उसमें मंच, साउंड, रोशनी और बैठक का बंटवारा बुकिंग पर लिखकर दे देते हैं। गांव तक सामान लाना-ले जाना 25 किमी तक मुफ़्त है: 99918 64283।
सवाल-जवाब
रागनी प्रोग्राम के लिए मंच और साउंड कैसा हो?Ragni program ke liye manch aur sound kaisa ho?
इतना ऊंचा मंच कि आख़िरी कतार तक दिखे, ऊपर छत ताकि साज़ न भीगें, और मंच के दोनों तरफ़ ऊंचाई पर स्पीकर, भीड़ दूर तक हो तो बीच में भी। गायकों और साज़ों के कई माइक मिक्सर पर, और घोषणाओं के लिए एंकर का अलग माइक।
रागनी के कलाकारों के लिए अलग जगह मिलेगी?Ragni ke kalakaron ke liye alag jagah milegi?
हां, मंच के ठीक पीछे कनात से घिरा कमरा, जिसमें दरी, कुर्सियां, पानी और रोशनी हो, ताकि कलाकार भीड़ से गुज़रे बिना कपड़े बदल सकें और आराम कर सकें।
दंगल में दर्शकों के बैठने का इंतज़ाम कैसे होता है?Dangal me darshakon ke baithne ka intezaam kaise hota hai?
अखाड़ा कमेटी बनाती है; उसके चारों तरफ़ आगे दरी और पीछे कुर्सियां, ताकि हर कोई देख सके, और धूप हो तो किनारों पर शामियाने। एक तरफ़ मेहमानों और जजों का मंच, एंकर के माइक के साथ।
मेले में स्टॉल के लिए कैनोपी मिलती है?Mele me stall ke liye canopy milti hai?
हां, भारत टेंट एंड लाइट हाउस, खोरडा स्टॉल के लिए कैनोपी एक कतार में लगाता है, रास्तों पर झालर और लाइट, और घोषणाओं के लिए जगह-जगह स्पीकर। कितने स्टॉल हैं, यह पहले बता दें।
खुले मैदान के बड़े कार्यक्रम का प्लान कैसे बनता है?Khule maidan ke bade karyakram ka plan kaise banta hai?
कमेटी से एक व्यक्ति तय करें और ये चार बातें बताएं: मैदान का नक्शा या फोटो, अनुमानित भीड़, कितने घंटे या दिन, और बिजली है या नहीं। इसी से मंच, स्पीकर, फ्लडलाइट और जनरेटर का पूरा प्लान बनता है।